वह अकेला है

वह अब भी अकेला है,
सदियों से यही होता रहा,
उसने जो भी कहा, 
किसी के समझ नहीं आयी,
भीड़ ने उसकी एक न सुनी,
वह चुप-चाप,
किसी कोने में जाकर खडा‌ हो गया, 
वक़्त का पहिया आगे बढा‌,
उलझने बढ़ने लगी,
तब वह कुछ याद आने लगा,
किसी ने कहा वह कबीर था,
कुछ ने कहा,
नहीं वह फकीर था,
अब उसे ढूंढने लगे,
पर कोई पहचानता नहीं था,
वह अब भी,
पास वाले कोने मे, 
खडा‌ बड़बडा रहा है,
जिसे कोई सुन नहीं रहा...

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