Posts

Showing posts from September, 2013

my childhood

Image
मेरे पीठ पर,
मेरा बचपन है, मै किससे?  क्या सवाल करूँ? जब धंधे पर बैठा, मेरा रहनुमा है ????

फसाद

Image
फसाद करना भी, लोगों का काम हो जाता है, कुर्सी पाने का, जरिया हो जाता है,  तब किसी का,  अफ़सोस करना भी,  उन्हें,   साज़िस का हिस्सा नज़र आता है।  जिन्होंने, न मालूम कितने,  बेगुनाहों का खून बहाया,  वही रहनुमा बन जाता है  किसे अच्छा कहूं, किसे बुरा कहूं, जब हर किसी ने   अपने पहलू में तेज़ धार वाला, खंजर रक्खा है, अभी वह चुप है,  शायद, घात लगाकर बैठा है, ऐसे ही अपने,
मौके का,  इंतजार करता है...