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sharaabi

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नशेड़ी     वह भरपूर नशे में  ऐसी जगह बैठा था  जहां शरीफ लोग नहीं आते-जाते  कम से कम उसे  अच्छी जगह तो नहीं कहते  हालांकि वहां भीड़ कम नहीं होती  यह कहें कि हर समय रौनक  ऐसी ही जगह पर रहती है ज्यादातर लोग  मुंह छुपा कर आते हैं अपनों से छिप छिपाकर आते हैं  या फिर ऐसे लोगों के साथ आते हैं  जो एकदम उनके जैसे होते हैं  उसकी हांँ में हांँ मिलाते हैं  सबके हाथों में प्याले हैं  यहां कुछ भी कम नहीं है  हर चीज की अपनी कीमत है  बस कुछ भी मुफ्त नहीं है  छोटे छोटे बदबूदार कमरे  उनमें एक बेतरतीब बिस्तर  यहां रिश्तों की कोई पहचान नहीं है सिर्फ एक ही रिश्ता है  जिसकी भी  खास कद्र नहीं है तुम कौन हो? इससे कोई मतलब नहीं  बस कुछ देर तक  फिर कौन कहां किसे पता  अगले ग्राहक का इंतजार  दलालों के बीच बंटते  पैसे का खेल  बोली लगती रही  बिकने वाले अनजान रहे  धीरे धीरे अपने हश्र तक पहुंचते रहे  किसी ने उनकी सुध नहीं ली  जब तक शरीर स्वस्थ है  जेब में प...