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Showing posts with the label एक कहानी

Safar

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मेरा सफर *********** परछाई का पीछा करता रहा हूँ, न जाने किसकी आरजू में, भटकता रहा हूँ, ए आइने में कौन है? जो मुझसे हर वक्त, कुछ कहता रहता है, मै बहुत पहले गाँव में, वो अपनी छोटी सी, मीठी नदी छोड़ आया, जहाँ आम के बाग थे, और इमली का पेड़ था, यकीन मानिए, उसकी पत्तियाँ भी खट्टी होती है, वक्त की किसे परवाह थी, वह तो हम सबकी मुठ्ठी में था, अभी आँख खुली तो देखा, मै किसी घने जंगल में, एक दम अकेला हूँ, जहाँ सब कंक्रीट और लोहे का है, न कोई कुछ सुनता है, न कहता है, और वो बूढ़ा दरख्त, आसपास नजर नहीं आता, जिसके छांव में वक्त भी, ठहर जाया करता था, खैर! मैंने आँख बंद की, उसी दुनिया में, लौट जाने की नाकाम, कोशिश करता रहा, कम्बख्त ए नींद, न जाने अब कब आए, वैसे मैने जो चाहा था, तूँने वही तो दिया, जिसकी शर्त यही थी, इस सफर में वापसी नहीं होगी, वक्त का पहिया चलता रहा, अब मेरे चारों तरफ, अथाह पानी है, पर! उसका एक कतरा, मैं पी नहीं सकता, तूँने तो पूरा समुंदर दे दिया, बस जीने का हक मुझसे मेरा छीन लिया। मैं इसी उदासी...

Parinda

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परिंदा *********  किसमें उसकी बेहतरी है   फैसले का ऐलान कर दिया  उसके चारों तरफ  हर चीज सुनहरा शानदार कर दिया।  वह समझता है, दिलोजान से मरता है,  यही कहता रहा,  सबसे उसके बारे में।  जरूरत की हर चीज,  बेशुमार भर दिया,  हर कोने में,  बस एक शर्त है,  इस मुहब्बत में,  उसे बोलनी है,  कोई और जुबान।  शुरू में थोड़ी तकलीफ हुई,  पर! वक्त के साथ सीख लिया,  कहे हुए को दुहराना बार-बार,  सभी खुश होते हैं,  सुनकर उसकी आवाज,  जबकि उसे मालूम नहीं है,  वह क्या कह रहा है,  जिसे सुनकर खुश हो रहे हैं,  इतना लोग आज,  परिंदे से प्यार जताने का,  ए नायाब तरीका है  उसके लिए छोटा सा,  खूबसूरत पिंजरा बनाना है,  बस इसकी छोटी सी कीमत है,  जो परिंदा चुकाता है,  उससे अनंत आकाश,  छूट जाता है,  और सदा के लिए,  पिंजरे का हो जाता है,  जहाँ परिंदा होने का एहसास,  धीरे...