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चिड़िया और पिंजरा  हम आजाद हैं  खुद को आजादी का  हिमायती कहते हैं  पर वह चिड़िया  जो आसमान की सैलानी है  उसे पिंजरे में रखना हैं  जबकि चिड़िया को यह सजा है  जिसे एक पंछी खूब समझता है  ऐसे ही जब किसी की  फितरत हो परिंदे की  तो वह भला  किसी भी कैद की  हिमायत क्यों करेगा? वह उड़ान की बात करता है  आसमान देखता है  यह अंतहीन सफर  जो रास्ते छूट गये कभी मुड़ कर  कोई उन्हें देखता नहीं  वापसी की गुंजाइश कहां रह गई  अब पंख में  वह ताकत नहीं रह गयी  उड़ने वाले खूब ऊंचा उड़  पर एक बात याद रखना  आसमान में किसी का  घर नहीं होता  हर शाम परिंदा लौट आता है  किसी साख पर  जहां एक छोटा सा घोंसला है  लौट आने की वजह यही है  यह उसका घर है  यहां आकर सुकून से  सो जाता है  ©️ Rajhans Raju  🌹🌹🌹🌹🌹🌹 Gamini की व्याख्या राजहंस जी, आपकी यह कविता स्वतंत्रता और वास्तविकता के बीच के द्वंद्व को बहुत ही गहराई से चित्रित करती है। आपने 'परिंदे' के माध्यम से म...