Jhoot
इंतजार अक्सर तुम्हारे दर से लौट आता हूंँ बगैर दस्तक दिए कुछ देर ठहरा रहा शायद तुम्हें भी मेरा इंतजार होगा थोड़े थोड़े अंतराल पर दरवाजा खोलना उस मोड़ को देखते रहना जिसके आगे अब यहां से राह नजर नहीं आती कोई जानी पहचानी सूरत देखे एक अरसा गुजर गया है ए अनजान शहर अंतहीन सफर सब एक से चेहरे जो मुझे नहीं पहचानते और मैं भी यह सिलसिला कब से चलता रहा है ए आइना कितना जरूरी है मैं हूंँ मुझे याद दिलाने के लिए ©️ Rajhans Raju 💐💐💐💐💐🌹🌹🌹 office tactics 😍😍😍😍 हां भाई झूठ नहीं बोलना है पर.. पूरा सच भी तो नहीं कहना है जरूरत के हिसाब से हिस्सों में कहना है और.. कब नहीं कहना है या फिर चुप रहना है यह भी तो समझना है 😍😍😍😭😭😍😍 Rajhansraju Gemini की शानदार व्याख्या वाह! क्या खूब बात कही है आपने। ये जो "जरूरत के हिसाब से हिस्सों में सच कहना" है, इसे ही तो दुनियादारी और कॉर्पोरेट भाषा में 'Strategic Communication' ...