Sonam wangchuk
सोनम वांगचुक मेरे गांव के हजार लोगों ने सरकार से यह मांग की, गांव में उन्हें अपनी university चाहिए जिसके लिए सरकार को तुरंत फंड देना चाहिए, यह मांग शिक्षा में क्रांतिकारी बदलाव के लिए बहुत जरूरी है पर यह निकम्मी सरकार सुनती ही नहीं, पिछले पचहत्तर साल से हमारा अदृश्य आंदोलन चल रहा है जिसमें मनमाफिक, नियमानुसार, अनुकूल समय पर पर्याप्त खा पीकर, सभी लोग सुविधा अनुसार भूख हड़ताल पर बैठ जाते हैं और समय पर हो रहे चुनाव में भागीदारी भी करते हैं, पर पता नहीं क्यों जनता को इन आंदोलन कारियों पर यकीन नहीं है और इनके चुनाव हारते ही लोकतंत्र खतरे में आ जाता है .. हम लोगों ने सपने में एक प्रस्ताव पारित किया है कि जब तक हम नहीं चुने जाएंगे, तब तक यहां की जनता निकम्मी, नासमझ, साम्प्रदायिक कही जाएगी, हमारी एक सबसे महत्वपूर्ण मांग जो हमारे छात्रहित से जुड़ी कि हमारे होनहार छात्र जिन परीक्षाओं में सम्मिलित होंगे, उसके पेपर वह खुद बनाएंगे और उसका मूल्यांकन भी वही करेंगे, इससे लीक होने का न केवल खतरा समाप्त हो जाएगा, बल्कि किसी और की, हर तरह की जिम्मेदारी भी खत्म हो जाएगी। अब तो मेर...