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आम का पेड़

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आते जाते कुछ लोगों ने, उसे पत्थर मारे, फिर थककर, उसी के पास बैठ गए, इस साल मौसम अच्छा नहीं था, वैसे भी आम का पेड़ है न, हर साल उतने फल नहीं लगते, अब बच्चों को कौन समझाए? मीठास लाने और पाने में, बहुत वक्त लगता है, फिर उम्र का तकाज़ा भी है अब उतने बौर नहीं आते, और बोझ उठाया भी नहीं जाता, पर उस बूढ़े दरख्त ने,  अपनी आदत नहीं छोड़ी, छांव लिए वैसे ही खड़ा है, जो हर मुसाफिर का, कुछ देर के लिए पड़ाव बनता है, उसके जर्जर शरीर में, अब बहुत कम, फिर भी, मीठे आम, लगते हैं।

इन छुट्टियों में

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इस बार की छुट्टियों में, एक छोटा सा पुल बनाते हैं, थोड़ा सा गाँव,  इस तरफ ले आते हैं, वैसे भी यहाँ फुर्सत किसे है? शहर को बहुत जल्दी है, वो तो पूरा, गाँव निगल जाता है-

संवाद

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वह मुसाफिर  जिसे अब ए भी याद नहीं, वह किस देश का है, उसकी जुबान कौन सी है? वह सारा जहाँ,  देखने का दावा करता है, हर मुल्क के बाशिंदों से मिला है, सब जगह उसके दोस्त रहते हैं, हलाँकि सभी जुबानें,  बोल तो नहीं पाता, पर तमाम जुबानों को, पहचान लेता है, और जब वह,  किसी अनजानी जुबान से मिलता है, चुपचाप उनको देखता है उनकी आँखों में सब कुछ, बाकियों जैसा ही तो रहता है, जिसको समझने के लिए, किसी जुबान का आना, जरूरी नहीं होता, बस थोड़ी देर ठहरकर,  महसूस करना है, ठीक उसी तरह,  जब बच्चे एकदम छोटे होते हैं, वो कुछ नहीं कहते, पर! माँ सब समझ जाती है, बिना शब्दों के, सारे संवाद हो जाते हैं, और कभी-कभी लगातार बोलते रहने के बाद भी, कोई संवाद कहाँ हो पाता है? बात उस समय की है, जब वह बहुत छोटा था, कहीं के लिए निकला था, शायद किसी चीज के पीछे, नन्हे कदमों से बहुत तेज, भागा था, वो क्या था?  अब तक नहीं समझ पाया, पर उसमें एक कशिश थी, जिसे पाने के लिए, उसके पीछे लगातार भागता रहा, और आज तक लौट नहीं पाया, इस अनंत यात्रा में  वह न जाने कौन-कौन सी भाषाएं सीखता रहा, फिर एकदिन ए सवाल भी लाजमी था, आखिर उसकी अपनी भाषा कौन सी है? जिसे उसने अपनी माँ से सीखा था, जिसमें वह …

I lost my sky

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I don't know  When I lost myself I remember long before, When I count stars With our friends And wakeup before the sun To see rising him East to the river We frame image, In the cloudy sky Rainbow apear With all colours of life We hold our hands And cry high Keep watching ants  And chase the birds In Paddy fields People called crazy child Slowly I became Intelligent and bright And stop framing, seeing sky Now I know importance About things, Everyone teaches me And i learn smarter then all Became perfect Like a machine They called me successful, I have everything But I lost my sky I am .. nothing. Without.  ..

दहलीज

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रोशनी और अंधेरे के बीच,  एक दहलीज है, वक्त का एक लम्हा,  ध जाने क्यों? कब से वहीं ठहरा हुआ है, अच्छा है बाकी सभी,  इस पार है,  नहीं तो उस पार है, उन्हें सिर्फ रोशनी, या अंधेरे से वास्ता है, दहलीज पर वो लम्हा, अब भी रुका है, उसके एक तरफ रोशनी है दूसरी तरफ घनघोर अंधेरा है।

सिर्फ़ मुखौटा है

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सुना है  बिकने को तूँ भी  तैयार था, इल्जाम लगाऊँ, या फिर यकीं कर लूँ, पर! चर्चा यही है, मनमाफिक कीमत नहीं मिली, तब खा़मियाँ गिनाने लगे खरीदार में। सच मानिए! अब भरोसा नहीं होता, कुछ भी देख, सुनकर, पता नहीं क्या मकसद है, यहाँ सब अइयार हैं। कोई तश्वीर देखकर, हमें लगा यह सुबह है, शायद! दिन की शुरुआत है, कुछ देर में ही यकीं जाता रहा, ए तो बिना चाँद वाली रात थी। उसने भी थककर, रुख़सत का फैसला किया, वैसे दोनों को, एक दूसरे से शिकायत नहीं थी, क्योंकि सच ? कुछ और भी था, जिसकी कभी चर्चा नहीं हुई। किसी वादे पर यकीं, कैसे कर लेंं? जब "मै" न जाने कहाँ? खुद को छोड़ आया हूँ,  सामने चेहरा नहीं मुखौटा है, हद तो ए है कि उसे भी , यह बात पता नहीं है, वह अब सिर्फ मुखौटा है।

मै ये नहीं

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मैने भी सुना है, ए कहते हुए, मै ए नहीं, मै वो नहीं, ऐसा करते हैं, एक छोटे से, सफर के बाद हम खुद को देखते हैं, किसको पता चलता है, वो क्या नहीं है? पर शर्त ए है कि उसे देखना आता हो, वह क्या है, क्या नहीं है। खैर कुछ मसक्कत की, और खुद को थोड़ा, गौर से देखा, तो जो हम थे, वो.. अब .. शायद! हम नहीं हैं। Rajhans Raju