Pagal
पागल मुझे लगा था वह मुझे देखकर ही अकारण हँसता है, मेरी ही बाट जोहता, उस मोड़ पर ठहरा हुआ है उसे भान था मेरे यहाँ से निकलने के समय का, और मुझे भी आदत हो चली थी उसकी निश्छल हँसी का परंतु यह मात्र मेरा भ्रम था, उसकी हँसी तो हर पथिक के लिए एक समान थी भाँति-भाँति के मुखौटे, विभिन्न प्रकार के लोग, कोई क्रुद्ध होता, कोई रुष्ट, कोई मौन साधे निकल जाता, और वह .. सबको देखकर अनवरत हँसता रहता संसार ने सहज ही मान लिया उसकी मानसिक दशा ठीक नहीं, तभी तो वह विक्षिप्त है, उसमें कोई विवेक नहीं किंतु ये ज्ञानी लोग भी तो एक अंतहीन होड़ में व्यस्त हैं, न जाने किस पूर्णता की खोज में युगों से त्रस्त हैं, जो न कभी प्राप्त होती है, न कभी संपूर्ण बनती है फिर एक दिन, उसे देखकर मेरे अधरों पर भी वही हास्य तैर गया, मुझे हँसते देख, एक क्षण को वह सहसा स्तब्ध रह गया उसने मेरी आँखों में झाँका, और फिर दुगुने वेग से अट्टहास कर उठा, जैसे उसने अपने...