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Satta Sangharsh

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सत्ता संघर्ष सत्ता के लिए राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी नए हथियार निरंतर आजमाते रहते हैं कि कैसे, किससे अपने विरोधी को मात दिया जाए और जब विरोध करने की सीधे सामर्थ्य नहीं होती, तब मुखैटे लगा लिए जाते हैं और बात होती है पर्यावरण, बच्चे, महिला, बेरोजगारी, शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य .. मतलब ए ऐसे मुद्दे हैं कि दुनिया के किसी भी देश/सरकार को इस पर आसानी से घेरा जा सकता है क्योंकि इसके अंतिम बिंदु तक पहुंचा ही नहीं जा सकता है। इस पर आप हमेशा आंदोलन कर सकते हैं और अपने लिए सहानुभूति बड़ी आसानी से पैदा कर सकते हैं और इतिहास बोध से दूर लोगों को तो आप तुरंत अपना फैन बना सकते हैं, जिन्हें पचीस-पचास साल के अंदर देश में कैसे, क्या हुआ यह जानने की न तो इच्छा और न ही सामर्थ्य है उनसे भला देश के इतिहास और दर्शन जानने की उम्मीद करना, उनके साथ अन्याय होगा, जो रील को अपनी जानकारी का प्रामाणिक स्रोत मानते हैं .. खैर हैं तो अपने ही लोग, मुखौटा हटते ही असली चेहरा भी सामने आ जाएगा, बस समय ज्यादा लगता है।        क्योंकि सामान्य लोग भावुक होकर मुखौटे को असली चेहरा समझ लेते हैं...

Sonam wangchuk

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  सोनम वांगचुक   मेरे गांव के लोगों ने सरकार से यह मांग की, गांव में उन्हें अपनी university  चाहिए जिसके लिए सरकार को तुरंत फंड देना चाहिए, यह मांग शिक्षा में क्रांतिकारी बदलाव के लिए बहुत जरूरी है पर यह निकम्मी सरकार सुनती ही नहीं, पिछले पचहत्तर साल से हमारा अदृश्य आंदोलन चल रहा है जिसमें मनमाफिक, नियमानुसार, अनुकूल समय पर पर्याप्त खा पीकर, सभी लोग सुविधा अनुसार भूख हड़ताल पर बैठ जाते हैं और समय पर हो रहे चुनाव में भागीदारी भी करते हैं, पर पता नहीं क्यों जनता को इन आंदोलन कारियों पर यकीन नहीं है और इनके चुनाव हारते ही लोकतंत्र खतरे में आ जाता है .. हम लोगों ने सपने में एक प्रस्ताव पारित किया है कि जब तक हम नहीं चुने जाएंगे, तब तक यहां की जनता निकम्मी, नासमझ, साम्प्रदायिक कही जाएगी,  हमारी एक सबसे महत्वपूर्ण मांग जो हमारे छात्रहित से जुड़ी कि हमारे होनहार छात्र जिन परीक्षाओं में सम्मिलित होंगे, उसके पेपर वह खुद बनाएंगे और उसका मूल्यांकन भी वही करेंगे, इससे लीक होने का न केवल खतरा समाप्त हो जाएगा, बल्कि किसी और की, हर तरह की जिम्मेदारी भी खत्म हो जाएगी। अब तो मेरे गां...

cockroach

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    कॉकरोच कॉकरोच तुम चेहरा हो कि मुखौटा किस बजबजाती नाली से निकले हो   उसका नाम क्या है  यह भी तो बता दो  अपने बारे में समझा दो  बड़े लोग अपने अनुभव से  बहुत सी बात करते हैं  जिसमें सब सही हो  या सब गलत हो  यह जरूरी तो नहीं है  हमारे सुप्रीम कोर्ट के  मुख्य न्यायाधीश ने  जो कुछ कहा है  वह सोच समझकर ही कहा होगा  हालांकि उन्हें  सच बोलने से बचना था काकरोच को  काकरोच नहीं कहना था  पर सच में उन्होंने किस संदर्भ में  क्या क्यों कहा? उनकी पूरी बात  सबको सुनना चाहिए  मुझे तो संदेह नहीं है  उन्होंने तो सिर्फ यही कहा था  कुछ लोग ऐसे होते हैं  जो सिर्फ गंदगी करते हैं  उनकी बात का मतलब यही था  जिनसे जब कुछ भी  बेहतर और अच्छा नहीं होता  क्योंकि जहां साफ-सुथरा  अच्छा कुछ हो रहा हो  वह वहां नहीं रह सकते  उन्हें बदबूदार गंदी नाली चाहिए  क्योंकि कॉकरोच वहीं रहते हैं  ऐसे में वह अपने मन माफिक  हर चीज ढूंढते लेते हैं  अरे भाई ...