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Ghar Waapsi

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रिसाव    कहीं कुछ रिस रहा है यह पानी की लकीर  बस यही तो बताती है  ऐसा लगता है  न जाने कब से  किसी के लिए  जैसे कोई रास्ता बना रहा हो कोई इन लकीरों पर भी  जैसे चलता रहता है  यह रिसाव धीरे-धीरे  अपनी जगह बड़ी करता रहता है  एक पूरा मकान  धीरे-धीरे खंडहर बन गया  इसकी शुरुआत  इसी रिसाव से हुई थी  और यह रिसता हुआ रिश्ता  जो इस मकान से लोगों का था  वह न जाने कहां  धीरे-धीरे चला गया  यह दूरी जानबूझकर  किसी ने नहीं चुनी  मगर जाना तो पड़ता है  हर चीज की  अपनी एक मियाद है  इस मकान की भी है  खैर अब यहां  कुछ और लोग रहने लगे हैं  एक छोटा सा पौधा  उस कोने में  जब पहली बार दिखा था  उसमें कुछ फूल भी लगे थे  जो लाल और पीले थे  काफी अच्छा, मनमोहक था  उसकी रंगत देखकर  उसको उखाड़ने का मन नहीं किया  उस वक्त यह महसूस हुआ  कम से कम कोई तो यहां  अपना रिश्ता बन रहा है  खुद को जमा रहा है  फिर मैं भी अनजाने सफर पर  न...