Ghost voter

 The Ghost voter

हाय रे तानाशाही!

मुर्दों से भी छीन लिया मतदान का अधिकार!

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Voter List के शुद्धिकरण से कुछ मोदी हेटरों के राजनीतिक जीवन में ऐसा भूचाल आया है कि अब उन्हें लोकतंत्र का भविष्य ही अंधकारमय दिखाई देने लगा है। वर्षों से चुनाव जीतकर सत्ता में आने की उम्मीद लगाए बैठे इन महापुरुषों को अब लोकतंत्र की पूरी व्यवस्था ही संदिग्ध लगने लगी है। लगता है, चुनाव के रास्ते सत्ता तक पहुँचने की उम्मीद कमजोर पड़ते ही कुछ लोगों ने सीधे लोकतंत्र के पोस्टमार्टम की तैयारी कर ली है। और जब-जब चेतना का कोई दौरा पड़ता है, बस एक ही आवाज गूँजती है— तानाशाह! तानाशाह! तानाशाही नहीं चलेगी!

अब जरा इनकी पीड़ा की गहराई समझिए।

सरकारी स्कूल चाहिए, सरकारी कॉलेज चाहिए, विश्वविद्यालय चाहिए, अस्पताल चाहिए, राशन चाहिए और सोशल मीडिया पर वीडियो अपलोड करने की पूरी आजादी भी चाहिए। प्रेस वार्ता करने की सुविधा भी चाहिए और अपनी बात को वायरल करवाने के लिए मीडिया का सहयोग भी चाहिए। मीडिया वाले भी पूरी तत्परता से लगे हैं। आखिर उनके भी धंधे का सवाल है। किसी की राजनीतिक दुकान चल रही है, तो किसी की टीआरपी की दुकान!

इन महापुरुषों की अति बौद्धिक बातें मैंने भी सुनीं। सुनकर पहले तो मन श्रद्धा से भर गया, फिर अचानक खुद पर तरस आने लगा।

हे प्रभु! इतने प्रतिभाशाली लोग इतने दिनों तक कहाँ छिपे रहे? देश इनकी असाधारण बुद्धि से अब तक वंचित क्यों रहा? हम जैसे साधारण बुद्धि के लोग आखिर किस खेत की मूली हैं, जो इतनी महान बातें सोच तक नहीं पाते? हमें क्षमा करिए, महापुरुषों! हमसे तो इतनी बे-सिर-पैर की बातें भी नहीं हो पातीं। 😍😍

और अब आइए, इनकी असली लोकतांत्रिक पीड़ा पर।

चुनाव आयोग ने मुर्दों के नाम क्यों काट दिए?

हाय! यह कैसी तानाशाही है? हमारे बेचारे Ghost Voters आखिर किस अपराध की सजा भुगत रहे हैं? जब तक वे वोट डाल रहे थे, तब तक लोकतंत्र की सेहत कितनी अच्छी थी! अब उनके नाम कट गए, तो लोकतंत्र को हीमा-हीमा बुखार चढ़ गया!

जरा सोचिए, जो लोग इस दुनिया में नहीं हैं, उन्हें भी मतदान के अधिकार से वंचित कर दिया गया। क्या यही है सबका साथ, सबका विकास? क्या मुर्दों के अच्छे दिन इसी तरह आने थे? क्या लोकतंत्र में अब केवल जीवित नागरिकों को ही वोट देने की अनुमति मिलेगी? यह कैसी संकीर्ण सोच है!

और केवल मुर्दे ही क्यों? कुछ लोगों के नाम अगर कई जगह दर्ज थे, एक ही Voter List में बार-बार दर्ज थे, तो इसमें उनकी क्या गलती? आखिर नाम दर्ज करने का काम भी तो व्यवस्था ने ही किया था! अब गलती सुधार दी गई, तो बेचारे उन नामों के सहारे लोकतंत्र की सेवा करने वालों का क्या होगा?

पहले एक ही व्यक्ति के कई नाम थे, कई जगह मतदान की संभावनाएँ थीं। एक शहर में खुद वोट डालिए, दूसरी जगह किसी अपने को भेज दीजिए। फर्जी पहचान के सहारे अगर कहीं और भी वोट पड़ जाए, तो मतदान प्रतिशत बढ़ाने में योगदान किसका हुआ? लोकतंत्र की भागीदारी बढ़ाने का इससे अधिक रचनात्मक मॉडल और क्या हो सकता है!

लेकिन हाय रे दुर्भाग्य! अब एक व्यक्ति, एक वैध पहचान और एक वोट की बात होने लगी है। लोकतंत्र की इस नीरस व्यवस्था में आखिर रोमांच बचा ही क्या? एक आदमी एक बार वोट देगा, तो दूसरी जगह उसकी लोकतांत्रिक प्रतिभा का उपयोग कौन करेगा?

एक वोट से इतनी भीड़ कैसे जुटेगी, महोदय?

और सबसे बड़ी समस्या यह है कि जिन नामों पर पहले कई-कई जगह लोकतंत्र की गाड़ी दौड़ती थी, वे नाम अब एक जगह सिमटने लगे हैं। किसी का नाम हट गया, किसी का दोहराव खत्म हो गया, किसी मृत व्यक्ति की प्रविष्टि मिट गई। अब सवाल यह है कि इस सुधार से दुखी लोगों की लोकतांत्रिक भावनाओं का पुनर्वास कौन करेगा?

मुझे तो लगता है कि चुनाव आयोग को एक अलग व्यवस्था करनी चाहिए। जो मतदाता जीवित हैं, वे सामान्य मतदान करें। जो दूसरे शहर में हैं, उनके लिए अलग व्यवस्था हो। और जो स्वर्ग सिधार चुके हैं, उनके लिए भी एक विशेष मतदान केंद्र बनाया जाए। आखिर वे भी कभी इस देश के नागरिक रहे होंगे! उनके लोकतांत्रिक योगदान को इस तरह भुला देना कहाँ का न्याय है?

हाँ, एक छोटी-सी समस्या है—उनके वोट डालने कौन आएगा? लेकिन जब व्यवस्था में कल्पनाशीलता की इतनी कमी हो, तो फिर लोकतंत्र की महानता का क्या होगा?

और अब सुनिए सबसे बड़ा अत्याचार!

पहले आप सरकार को तानाशाह कह सकते थे, प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सकते थे, वीडियो बना सकते थे, सोशल मीडिया पर लगातार अपलोड कर सकते थे और अपने आरोपों को देशभर में पहुँचाने की कोशिश कर सकते थे। अब भी ये सब हो रहा है। मीडिया भी सुन रहा है, दिखा रहा है और बहस भी करवा रहा है।

फिर भी शिकायत यही है—हमें बोलने नहीं दिया जा रहा!

भाई साहब, अगर बोलने नहीं दिया जा रहा, तो आपकी यह पूरी प्रेस वार्ता किस लोकतांत्रिक आत्मा के सहारे चल रही है? आपके वीडियो किस अदृश्य सेंसर की अनुमति से लाखों लोगों तक पहुँच रहे हैं? और आपकी बात सुनने के लिए इतने सारे मंच उपलब्ध हैं, तो यह शिकायत आखिर किस मंच से की जा रही है?

कहीं ऐसा तो नहीं कि आपको बोलने की आजादी चाहिए, लेकिन आपकी बात से असहमत होने वालों को चुप रहने की आजादी भी नहीं होनी चाहिए? सवाल पूछने का अधिकार सिर्फ आपका हो और जवाब देने का दायित्व केवल दूसरों का?

वैसे, सरकार की आलोचना करना लोकतंत्र का अधिकार है। चुनाव आयोग के काम पर सवाल उठाना भी नागरिकों का अधिकार है। मतदाता सूची में वास्तविक गड़बड़ियाँ हों, किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से काटा गया हो, तो उसकी जाँच और सुधार होना ही चाहिए। लेकिन एक बात समझ में नहीं आती—जहाँ वास्तविक गड़बड़ी हो, वहाँ सबूत माँगना तानाशाही कैसे हो गया? और जहाँ दोहराव या मृत मतदाता की प्रविष्टि हो, उसे सुधारने पर लोकतंत्र की हत्या कैसे हो गई?

अगर नाम गलत तरीके से काटे गए हैं, तो उनकी बहाली की माँग कीजिए। अगर किसी पात्र नागरिक का वोट छिना है, तो उसके अधिकार की लड़ाई लड़िए। लेकिन हर सुधार को षड्यंत्र और हर सवाल को तानाशाही घोषित कर देना भी तो बुद्धि पर कुछ अधिक ही अत्याचार है!

हे महापुरुष! आपकी लोकतांत्रिक चिंता देखकर मन सचमुच द्रवित हो जाता है। आप जीवित मतदाताओं के अधिकारों के लिए भी लड़िए, मृत मतदाताओं के नामों की प्रविष्टियों पर भी बहस कीजिए, लेकिन यह तो बताइए कि लोकतंत्र में मतदाता की संख्या बढ़नी चाहिए या एक मतदाता के नाम पर वोटों की संख्या?

हाय रे मेरी बुद्धि! तू भी कितनी पिछड़ी हुई है! तू आज तक यही समझती रही कि लोकतंत्र में हर पात्र नागरिक का एक वोट होता है। तूने तो कभी सोचा ही नहीं कि एक ही नाम कई जगह हो, मृत व्यक्ति भी मतदाता सूची में बना रहे और हर बार मतदान का अवसर आए तो लोकतंत्र की प्रतिभा का प्रदर्शन कुछ और भव्य हो जाए!

सचमुच, कैसा समय आ गया है!

अब एक व्यक्ति को एक ही वोट देना है। एक ही जगह मतदान करना है। और अगर नाम गलत है, तो उसे ठीक करवाना है। इतनी सारी पाबंदियाँ! इतनी कम आजादी!

यह तानाशाही नहीं तो और क्या है?

मुर्दों के वोट वापस लाओ! दोहरे नामों की लोकतांत्रिक गरिमा बहाल करो! एक व्यक्ति को एक से अधिक जगह लोकतंत्र की सेवा करने का अवसर दो!

तानाशाही नहीं चलेगी! लोकतंत्र बचाओ! Ghost Voters के अधिकार बहाल करो! 😍😍😍

©️ Rajhans Raju



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ए चुनाव आयोग का जवाब है जिसे नहीं मानना है, जो बिना आधार के आरोप है उसे सही मानना है, उसके लिए न तो FIR करना है और न Court में जाना है, सिर्फ media के लिए खबर बनाना है 

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मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) के दौरान सामने आए लगभग 13.39 करोड़ नामों के संशोधन और हटाए जाने के मामले में निर्वाचन आयोग द्वारा इन मतदाताओं को मुख्य रूप से ASDD श्रेणी के तहत वर्गीकृत किया गया है:


A – Absent (अनुपस्थित / अप्राप्त)

S – Shifted (स्थान परिवर्तन कर चुके)

D – Dead (मृत)

D – Duplicate (दोहरी प्रविष्टियां)

श्रेणीवार विवरण

श्रेणी - अनुमानित संख्या (विवरण)

(1) स्थायी रूप से स्थानांतरित (Shifted) - 6.30 करोड़

वे नागरिक जो रोजगार, विवाह या अन्य कारणों से अपने मूल पंजीकृत पते को छोड़कर किसी अन्य स्थान पर बस चुके हैं।

(2) अनुपस्थित / ट्रेस न होने वाले (Absent / Untraceable) - 3.01 करोड़

बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) द्वारा घर-घर सत्यापन के दौरान जो लोग अपने पते पर लंबे समय से नहीं मिले या जिनका पता सत्यापित नहीं हो सका।

(3) मृत मतदाता (Dead / Deceased)  - 2.80 करोड़

ऐसे मतदाता जिनकी मृत्यु हो चुकी है, परंतु स्थानीय निकाय या परिजनों द्वारा मृत्यु प्रमाण पत्र प्रस्तुत न करने के कारण उनका नाम सूची में बना हुआ था।

(4) दोहरी प्रविष्टियां (Duplicate / Multiple Entries) - 1.02 करोड़

एक ही व्यक्ति का नाम एक से अधिक बूथों या अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में दर्ज था, जिसे सॉफ्टवेयर और मैपिंग के जरिए चिन्हित किया गया।


(5) अन्य प्रविष्टियां (Others)  - 0.26 करोड़

अमान्य पहचान, गैर-नागरिक या अन्य तकनीकी विसंगतियों वाले मामले।

नाम कटने की स्थिति में क्या करें?

ड्राफ्ट सूची से नाम हटने का अर्थ अंतिम निष्कासन नहीं होता। यदि किसी पात्र नागरिक का नाम गलती से कट गया है:


सत्यापन: चुनाव आयोग के आधिकारिक पोर्टल (voters.eci.gov.in) या Voter Helpline App पर अपना EPIC नंबर डालकर स्थिति जांचें।


पुनः नाम जुड़वाना: नाम न होने पर फॉर्म 6 

(Form 6) भरकर नए सिरे से पंजीकरण के लिए ऑनलाइन या संबंधित BLO के पास ऑफ़लाइन आवेदन किया जा सकता है।


दावा और आपत्ति: पुनरीक्षण अवधि के दौरान संबंधित मतदाता पंजीकरण अधिकारी (ERO) के समक्ष दावा प्रस्तुत किया जा सकता है।


अगर कोई कहे कि उसका नाम वोटर लिस्ट से कट गया है, तो सबसे पहले उसका EPIC नंबर पूछिए और ECI NET पर जाँच कीजिए।

यहाँ से वोटर लिस्ट डाउनलोड करने, वोटर आईडी में संशोधन, नए वोटर कार्ड के लिए आवेदन, नाम कटवाने और आवेदन का स्टेटस देखने जैसी सुविधाएँ मिलती हैं। BLO और संबंधित अधिकारियों की जानकारी भी उपलब्ध रहती है।

ये सुविधाएँ पहले से मौजूद हैं, लेकिन सही जानकारी देने पर व्यूज़ जो नहीं मिलते!

बताइए, क्या आपके मोबाइल में ECI NET ऐप है?


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