Posts

Showing posts from 2026

Dussehra

Image
  रावण का आकर्षण और राम होने की कठिन साधना सोने की लंका से रामराज्य तक की आध्यात्मिक यात्रा रावण का आकर्षण सदियों से बना हुआ है। यह स्वाभाविक भी है। सोने की लंका, दस सिर, बीस भुजाएँ और अपार शक्ति—भला ऐसा वैभव किसे आकर्षित नहीं करेगा? एक ही व्यक्ति में दस लोगों जितना बल, असाधारण विद्वता, अपार धन-संपत्ति और तीनों लोकों को चुनौती देने का साहस! लेकिन जब सामर्थ्य के साथ विवेक और विनम्रता न हो, तो अहंकार का जन्म भी स्वाभाविक हो जाता है। और जब अहंकार अपनी सीमाएँ भूल जाता है, तब रावण का अंत भी रावण जैसा ही होता है। रावण की सबसे बड़ी विडंबना यही थी कि उसके पास सब कुछ था, लेकिन वह अपने भीतर के अहंकार पर विजय नहीं पा सका। उसने संसार को जीतने की आकांक्षा रखी, लेकिन स्वयं को जीतने की साधना नहीं की। शायद यही कारण है कि रावण का आकर्षण आज भी बना हुआ है। हमारे समाज में सदैव एक ऐसा वर्ग रहा है, जो किसी भी प्रचलित मान्यता का विरोध करके अपनी अलग पहचान बनाना चाहता है। कई बार विरोध केवल विचार नहीं रह जाता, बल्कि प्रसिद्धि पाने का आसान माध्यम बन जाता है। जिस पात्र की आलोचना करना कभी नैतिक साहस ...