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Vulture

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गिद्ध    गिद्ध कई दिनों से परेशान था उसकी भी जिंदगी का सवाल था वह गोश्त खाता है कैसा किसका इससे उसको कोई मतलब नहीं है ना तो कोई फर्क पड़ता है उसका पेट भरना चाहिए अगर गिद्ध यह विचार करने लग जाए गोश्त कैसा है क्या वह कभी खा पाएगा उसका गिद्धपन रह जाएगा गिद्ध के बने रहने की पहली शर्त यही है वह गोश्त खाता रहे कहीं दूर बैठकर यही सोचता रहता है अच्छा गोश्त कहां कैसे मिले हमने कहानी सुनी है कुछ लोगों को अनिष्ट होने पर ही रस मिलता है क्योंकि उनकी रोजी-रोटी उसी से चलती है शमशान में जब भीड़ बढ़ जाती है कुछ चेहरे खिल जाते हैं वहां भी व्यापार होता है लकड़ियों का चिता जलाने का गिद्धों के लिए भी जरूरी है उन्हें कुछ मिलता रहे जो उनको भाता हो जिसे वह चबा चबाकर खाता हो फिर गिद्ध के पीछे गिद्ध धूमधाम से लग जाते हैं गिद्ध गान शुरू हो जाता है पूरा झुंड एक साथ है एक जैसी आवाज में सब सुर मिलाते हैं देखो यहां पर गोश्त है एक दूसरे को बताते हैं गिद्ध को नोचने में बहुत मजा आता है गिद्ध की चोंच बहुत तेज है जिसमें धार कहीं और से आता है हालांकि उनकी संख्या निरंतर कम होती जा रही है मगर जितने हैं गिद्ध होने के...

Darakht

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सूखा दरख़्त  हर किसी के लिए,  एक मियाद तय है,  जिसके दरमियाँ सब होता है,  किसी बाग में,  आज एक दरख्त सूख गया,  हलांकि अब भी,  उस पर चिड़ियों का घोसला है,  शायद उसके हरा होने की उम्मीद,  अब भी कहीं जिंदा है,  मगर इस दुनियादारी से बेवाकिफ,  इन आसमानी फरिश्तों को,  कौन समझाए?  अपनी उम्र पार करने के बाद,  भला कौन ठहरता है?  किसी बगीचे में,  पौधे की कदर तभी तक है,  जब तक वह हरा है,  उसके सूखते ही,  उसको उसकी जगह से,  रुखसत करने की,  तैयारी होने लगती है  ऐसे ही उस पर,  कुल्हाड़ियां पड़ने लगी,  बेजान सूखा दरख्त,  आहिस्ता-आहिस्ता बिखरने लगा,  वह किसका दरख्त है,  अब यह सवाल कोई नहीं पूछता,  क्योंकि सूखी लकड़ियां,  किस पेड़ की हैं,  इस बात से कोई मतलब नहीं है,  बस उन्हें ठीक से जलना चाहिए,  जबकि हर दरख़्त की,  एक जैसी दास्तान है,  वह अपने लिए,  कभी कु...