अफ़वाह

किसी घर को तूने आज़ बेरंग कर दिया,
मज़हब के नाम पर ए क्या हो गया?
इंसानियत शर्मसार करके,
कौन सा झंडा बुलंद हो गया?
 हाथ में शोले हो तो कब तक बचेगा?
 तूँ भी यतीम होगा, तेरा भी घर जलेगा।
वह घर जो तूँ जलाकर आया है,
उसके शोले अब भी वहाँ कायम है,
वही नफरत, अब वहाँ से उठेगी,
वैसे भी चिंगारियों को, 
शोला बनने के लिए,
एक अफवाह ही काफी है..

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