निकम्मा😀😀

यूँ खुश होकर, 
तालियाँ मत बजाओ,
यहाँ सवाल खुद को, 
पाने और खोने का है,
दर्द ए है कि खुद के मरने का, 
मातम भला कैसे मनाए?
जबकि अब भी,
गरदन बहुत कसके दबी है,
मुँह टेढ़ा हो गया है,
और जीभ ऐंठ गयी है,
सिर्फ एक ही कमी है
मरने वाली feeling नहीं दिखती,
कमबख्त शक्ल ही ऐसी है,
लगता है हँस रहा,
वैसे ही जैसे बिना चेहरे वाले,
कंकाल होते हैं,
जो चेहरों पर हंसते है,
वो न तो अपना,
न तो दूसरों का चेहरा देखते हैं,
अब उन्हें ए मालूम है,
असल में जो है,
उसमें आँख नहीं है,
और चेहरों में कोई फर्क नहीं है,
अब वह चेहरे के साथ भी हंसता है
हश्र चेहरे का,
उसने, जबसे जाना,
उसके चेहरे पर, 
अनायास हंसी रहने लगी,
उसके यूँ हँसते रहने पर,
उस पर बेहया होने का इलजाम,
लगता है,
कैसा निकम्मा है,
देखो,
अब भी,
कैसे हँस रहा है।
😁😁😁😁😁
rajhansraju

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