Tuesday, 29 April 2014

आहट

 
आवाज़ आहट की उसके,
कुछ इस तरह आती है,
हवा चुप-चाप छूकर गुज़र जाती है।
उसके होने की तमाम निशानियाँ,
बिखर जाती हैं,
वह ख़ामोशी से
जब कहीं से गुज़र जाती है,
उसकी खुशबू अब तक यहाँ कायम है,
तितलियाँ आकर यही बताती हैं,
चिड़ियों ने चहचहाकर जो गीत गाया है,
उसकी धुन से यह राग आया है,
बंद आँखों से जो दुनिया दिखाई देती है,
उसकी चाहत है,
हर तरफ,
एक आहट सुनाई देती है।