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Showing posts from February, 2011

black hole

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चाहता था कहूं रुक जाओ,  पर कहा नहीं . छूने को अक्सर सोचता था, पर छुआ नहीं.  धरती से आसमान को देखता था , वह नीला, काला, खामोश था.  धरती अपनी जगह थी, आसमान भी ऐसा ही था . न एक दूसरे को छुआ, न कुछ कहा,  धरती आसमान की गोद में घूमती रही . सूरज का चक्कर लगाती रही,  आसमान यूँ ही देखता रहा . अनंत काल से,  धरतियों को सूरज की परिक्रमा करते हुए . सदियाँ पता नहीं कब बीत जाती हैं,  देश काल की अनंत यात्रा में . सब कुछ शून्य ही रह जाता है, जहाँ से शुरू हुआ था, आज भी सब वहीँ हैं. आसमान साक्षी है,  हजारों सितारों का.  शून्य से उत्पन्न होकर,  उसी में खो जाने का . ब्लैक होल में विलीन हो जाना,  सितारों की यात्रा है . मनुष्य जैसी रिक्तता,  आसमान में भी है .  सब पूरा करने, पाने की कोशिश में,  हरदम कुछ रह जाता है , यही रिक्तता,  मानव का दुःख,  आसमान का ब्लैक होल बन जाता है...  

सक्षम

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ए तो बड़ा सच्चा है , नटखट छोटा बच्चा है , झटपट करता रहता है, सरपट चलता रहता है, खटपट थोड़ी हो गयी है, समझो गड़बड़ हो गयी है, देखो, पकड़ो, जल्दी इसको,  भागम भाग मचाया है, उथल पुथल  सब हो गया है,  जब से!  घर में आया है।
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चिड़िया 


देखो चिड़िया रानी को,
बड़ी सयानी नानी को.
तितली फूल पे बैठी है,
रंग बिरंगी लगाती है.
दूध में मलाई है ,
बिल्ली घर में आई है.
चूहा अभी जागा है,
बिल्ली देख के भगा है.
पापा जल्दी आए हैं,
लड्डू-पेडा लाए हैं.
अब जल्दी जाता हूँ,
एक मिठाई खाता हूँ.
मत पीना चाय-वाय,
नमस्ते, टाटा, बाय-बाय.
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गुड़िया


सुबह-सुबह चिड़िया बोली,
उठ जा प्यारी गुड़िया बोली.
जल्दी-जल्दी तुम उठ जाना,
अच्छे से फिर खाना खाना,
मन लगाके करो पढाई,
ना किसी से करो लड़ाई.
सच्ची बात हरदम करना,
अच्छा सच्चा तुमको बनना.
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