Wednesday, 28 June 2017

आदमी मोबाइल है

कहता तो यही है कि वो "है"
पर पता नहीं चलता,
हलाकि उनके पास आँख है,
पर देखना नहीं आता,
एकदम कैमरा,
बस click click.
सुना है कान भी है,
पर जो सुनना चाहिए,
वो सुनाई नहीं देता।
smart तो बहुत है,
एक ही कमी है
अपनी अक्ल नहीं है।
अरे वो आदमी नहीं,
पूरा मोबाइल है।
rajhansraju

Saturday, 24 June 2017

चाय

फुर्सत के लम्हों में,
चाय की चुस्की का अपना ही मजा है।
इसी थोड़े से वक्त में दोस्तों के साथ,
किसी बात पर बेमतलब खिलखिला उठना,
सारी थकान का पल में खत्म हो जाना,
फिर अपने काम में, बिना शिकायत 
हँसते हुए लग जाना ....
rajhansraju

यहाँ कौन रहता है?

सुना है,
वो हर जगह रहता है
उसे मिट्टी-सोने से
कोई फर्क नहीं पड़ता है
पूरी कुदरत वही रचता है
फिर इन शानदार इमारतों में
भला कौन रहता है?
वैसे इन दरवाजों पर
दस्तक भी जरूरी है
लोगों के आने-जाने से,
न जाने कितनों की,
रोजी-रोटी चलती है।
पत्थर तो हर जगह,
बिखरे हैं।
मगर!
कारीगरी का हुनर,
बगैर पैसे के नहीं दिखता।
चलो माना,
खुदा हर जगह है,
मगर जिंदा रहने के लिए,
रोटी कमानी पड़ती है।
rajhansraju

Thursday, 22 June 2017

नींव की ईंट

उसे कोई अफसोस नहीं है,
खुद के दफ़न होने से।
न तो कोई चिढ़ है,
उन ईंटो से,
जो उसके ऊपर हैं,
उन्हीं से बना ढाँचा,
इमारत को आकार देता है।
जिस पर इतना कुछ टिका है,
किसी को कहाँ नजर आती है,
वो नींव की ईंटे।
शायद! कुछ लोग
यह बात समझते हैं,
तभी! बड़े अद़ब से,
बुजुर्गों के सामने,
झुक जाते हैं।
rajhansraju

शहर जिंदा है

सड़क पर आते जाते,
कुछ यूँ  हुआ कि,
आमने सामने आ गए,
दोनों जल्दी में थे।
एक का रास्ता गलत था,
पहला नाराज हुआ,
उसके गलत होने की शिकायत की,
दूसरा शरीर से मजबूत था,
भड़क गया गाली देने लगा,
जाति धरम की बात आने लगी।
तभी लगा कोई चिंगारी कैसे?
शोलों में बदलती है,
फिर हवा चलती है,
और एक पूरे शहर पर,
बदनुमा दाग लग जाता है।
अच्छा हुआ शहर वाले,
समझदार निकले
दोनों को फटकार लगायी।
ताकत का फैसला करना है,
चलो किसी अखाड़े में कर लो,
कमबख्ततों!
जो हरदम रिसता हो,
शहर को,
वो घाव मत दो,
उसे तकलीफ होती है,
क्यों कि यह शहर,
जिसमें हम रहते है,
जिंदा है।
rajhansraju

Tuesday, 20 June 2017

नालायक

वह घर लौट कर आया,
हर तरफ सन्नाटा पसरा है।
सभी कुछ अपनी जगह पर,
बड़े सलीके से रखा है।
पिछले हफ्ते कुछ सामान
इस कमरे में छूट गया था,
वह अब भी,
वेसे ही पड़ा है।
भला वह नाराज किससे हो,
जब घर में अकेला हो।
सब कहते हैं,
वह बड़ा खुश नसीब है
उसके सभी बच्चे,
बडे काबिल निकले।
जो उससे दूर,
किसी और शहर में रहते हैं।
सभी सक्षम हैं
किसी को किसी और की,
जरूरत ही नहीं है।
कोई शिकायत करने
सुनने वाला भी नहीं है।
फिर क्यों कुछ सही नहीं है,
एक बाप
और तन्हा उदास हो जाता है
क्यों कि
जो
बच्चे जिद करते
अब साथ नहीं हैं।
ऐसे में तो यही लगता है
काश कोई संतान
थोड़ी सी नालायक होती,
दिन-रात, लड़ता-झगड़ता,
जिद करता,
मगर साथ होता। 
rajhansraju

तूँ वो नहीं है

आज
कई दिनों बाद
आइना देखा
हाँ! पहचानता हूँ
शक्ल तो तकरीबन 
वैसी ही है
जैसा देखा था
फिर यकीन क्यों नहीं होता?
अब भी लग रहा
तूँ वो नहीं है..

Wednesday, 14 June 2017

a temple in the moll

इमारत बहुत ही शानदार
आसमान तक ऊँची है,
भव्यता, ऐश्वर्य
कोई मामुली चीज नजर आती है।
सब कुछ सोने की तरह,
महिमा मंडित हो रहा है,
इतनी ज्यादा रोशनी है कि,
कुछ नजर नहीं आता।
राधे राधे की आवाज हर जगह है,
पर यह कान्हा की पुकार तो नहीं है।
भला कृष्ण, राधा को
इतनी बार आवाज क्यों देंगे?
जबकि कान्हा से ही राधा बनी है,
और राधा में पूरे कृष्ण बसते हैं,
इस चमक दमक में,
जमुना की माटी और पानी नहीं है,
मेरे कान्हा की,
कोई निशानी नहीं है।
यहाँ सबकुछ है,
बस कान्हा नहीं है।
rajhansraju