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Showing posts from November, 2017

जरा गौर करना

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चुप रहने कि कोशिश नाकाम रहती है, क्या करे वो जो देखता है, सुनता है, महसूस करता है, वह नारा बनता भी है, लगाता भी है, और परेशान रहता है अपनी पहचान के खातिर, फिर देखता है, अपने जैसे तमाम चेहरे, जो भीड़ में निकले हैं, क्या सिर्फ खो जाने को ? वो देखो? कौन है? उस जगह पर, कुछ बाँध रहा है? या समेट रहा है खुद को, सबके बीच में, सबसे जुदा नजर आता है वो, ए सच, सिर्फ तुझको मालूम है, कौन है वो? हाँ ! जरा गौर कर, तूँ जिससे कुछ कह रहा, और जो तूँ सुन रहा है, देख तेरे आसपास, तेरे सिवा, कोई नहीं है.. rajhansraju

ताला बंद है

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एक दरवाजा,  जो शदियो से नहीं खुला, उसके बारे में, तमाम कहानियाँ कही जाती है, कुछ लोग बताते है, ए दरवाजा किसी महल में, जाकर खुलता है, हलाँकि उसके पीछे, कोई इमारत, तो नजर नहीं आती, बस! एक छोटी सी दीवार है, जिसमें ए दरवाजा है, उसमें एक बड़ा सा ताला लगा है, यहाँ के लोग, जो कहानी कहते हैं, उसमें किसी राजा का जिक्र आता है, जो बड़ा बेरहम था, पर! उसकी एक कमजोरी थी, वह हर खूबसूरत चीज, सदा के लिए, अपने पास रखना चाहता था, इसके लिए, उसने, शानदार कैदखाने बनवाए, उनके दरवाजों पर, रत्न जडित ताले लगवाए, उसे खुद के अक्श से भी, बेशुमार मुहब्बत थी, एक कमरे में तो सिर्फ! आइना था, जहाँ राजा खुद को देखता था, और पहले जैसी शक्ल, तलाशता रहता, उसकी बदनसीबी तब शुरू हुई जब, आइने में,  हर दिन, कोई और आदमी, नजर आने लगा, जिसका जिक्र, वह किसी से नहीं करता, राजा जो ठहरा? लोग हंसेगे? कमरे में तो सिर्फ आइना है, वह चुपचाप, खुद को ढूंढने की नाकाम, कोशिश करता रहा, अकेले में आइना देखता रहा, धीरे-धीरे उसने, सबको आजाद कर दिया, बस यही एक ताला, जो अब तक बंद है जिसकी चाभी, उससे, न जाने कहाँ? गुम हो गयी, कहते है…