लेखा-जोखा


लेखा जोखा बड़े गौर से देखा,
नफ़ा नुकसान एक खेल है,
तेरा अच्छा होना,
तेरे लिए ठीक नहीं है।
क्यों कि तेरा कोई मोल नहीं है
तूँ बाजार के लायक नहीं है,
फिर जो बिकता नहीं,
सच में बेकार है।
वैसे खरीदार कौन है,
ए ठीक से पता नहीं है,
सभी एक जैसे,
लम्बी कतार में,
कैसे भी?
कुछ मिल जाएँ,
बिकने को तैयार हैं।
rajhansraju

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