मुसाफिर


अरे मुसाफिर ए बता,
क्या तूँ उसी शहर में है?
जहाँ के लिए निकला था,
सफर कैसा रहा?
राह कैसी थी?
कितने शहर गुजरे,
क्या वो तेरे शहर जैसे थे,
या कुछ और थे?
अजनबी को देखकर चौके,
या फिर हँसते रहे,
क्या दूसरे शहर का हाल पूँछा,
या अपने में  खोए रहे,
खैर अपना खयाल रखना,
सुना है वो शहर बड़ा,
शानदार है,
लोग उसकी चमक में खो जाते हैं,
फिर कभी,
अपने शहर,
लौटकर नहीं आते हैं।
rajhansraju

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