नालायक


वह घर लौट कर आया,
हर तरफ सन्नाटा पसरा है।
सभी कुछ अपनी जगह पर,
बड़े सलीके से रखा है।
पिछले हफ्ते कुछ सामान
इस कमरे में छूट गया था,
वह अब भी,
वेसे ही पड़ा है।
भला वह नाराज किससे हो,
जब घर में अकेला हो।
सब कहते हैं,
वह बड़ा खुश नसीब है
उसके सभी बच्चे,
बडे काबिल निकले।
जो उससे दूर,
किसी और शहर में रहते हैं।
सभी सक्षम हैं
किसी को किसी और की,
जरूरत ही नहीं है।
कोई शिकायत करने
सुनने वाला भी नहीं है।
फिर क्यों कुछ सही नहीं है,
एक बाप
और तन्हा उदास हो जाता है
क्यों कि
जो
बच्चे जिद करते
अब साथ नहीं हैं।
ऐसे में तो यही लगता है
काश कोई संतान
थोड़ी सी नालायक होती,
दिन-रात, लड़ता-झगड़ता,
जिद करता,
मगर साथ होता। 
rajhansraju

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