a temple in the moll


इमारत बहुत ही शानदार
आसमान तक ऊँची है,
भव्यता, ऐश्वर्य
कोई मामुली चीज नजर आती है।
सब कुछ सोने की तरह,
महिमा मंडित हो रहा है,
इतनी ज्यादा रोशनी है कि,
कुछ नजर नहीं आता।
राधे राधे की आवाज हर जगह है,
पर यह कान्हा की पुकार तो नहीं है।
भला कृष्ण, राधा को
इतनी बार आवाज क्यों देंगे?
जबकि कान्हा से ही राधा बनी है,
और राधा में पूरे कृष्ण बसते हैं,
इस चमक दमक में,
जमुना की माटी और पानी नहीं है,
मेरे कान्हा की,
कोई निशानी नहीं है।
यहाँ सबकुछ है,
बस कान्हा नहीं है।
rajhansraju

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