तूँ कैसा है?


रंग तेरा आसमनी है
हमको लगता है
दिन-रात के साथ तूँ बदलता है
चटख लाल, काला भी दिखता है
बेरंग रहकर रंगों को रचता है।
चलो हम भी एक काम करते हैं
उसकी बनायी दुनिया में
खूबसूरत रंग भरते हैं
थोड़ा नाराज होकर साथ चलते हैं
अच्छा होता है बेवजह मुस्करा लेना
रंग से सरोबार होकर
चेहरों को भुला देना
किसकी शक्ल कैसी है
परेशाँ क्यों है?
वैसे भी तूँ
न तो पानी है
न आइना है।
थोड़ा सा रंग हाथों में लेकर
सबसे पहले अपना चेहरा भुला दे
फिर धुलकर देखना क्या मिलता है
पहले जैसा कुछ बचता है?
या वही बेरंग चेहरा है
जिस पर कोई रंग चढ़ता नहीं है
rajhansraju

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