पिंजडा


आजाद बंदों को अपनी,
एक दुनिया चाहिए
परिंदे को, पिंजडा छोड़कर,
उड़ जाना चाहिए।
पर! भूल गया है उड़ना
अब बेचारा क्या करे?
रोशनी इतनी है कि आँख खुलती नहीं
शोर चारों तरफ है, कुछ सुनाई देता नहीं
भीड़ में अकेला हैं, कोई दिखाई देता नहीं
फिर शिकायत भला किससे करे
ए रास्ता,
उसने खुद चुना है
सुनहरे
पिंजडे
के लिए ।।
rajhansraju

Comments

स्मृतियाँ

सक्षम

अग्नि-परीक्षा