child soldier

लड़ रहा हूँ मै यहाँ न जाने किसके लिए,
किससे बदला लूँ किसका कत्ल करूँ,
मेरे गाँव से शहर तक एक ही मंजर है,
मेरे लिए कोई जगह नहीं है,
वो कहते हैं, तुझे लड़ना होगा,
तूँ हमारा है, तेरे लोग खतरे में हैं,
तूँ हमारा है, हमारे साथ चल, तुझे सब मिलेगा,
बस ए वाला हथियार अपने साथ रख,
मैंने पूँछा मेरा घर कहाँ है?
उसने आँखे लाल की,
एक झंडा‌ दिया, फिर नारा दिया,
क्या ए काफी नहीं है? तेरे लिए,
घर की बात तो कायर करते हैं,
हम तो आग हैं, जलते हैं, जलाते हैं,
तभी मै समझा,
मेरा घर क्यों जला,
वहाँ पहले से ही कोई मौजूद था,
जिसमें यही आग भरी थी,
न जाने कब से जल रहा था,
जिसकी चिंगारी से मेरा घर राख हुआ,
उसकी बात ड़र कर सुनता रहा,
वह खतरों की बात करता रहा,
उसकी शक्ल, उसकी बात,
मुझे डराती रही,
फिर ज़ोर-ज़ोर नारे लगे,
और मै खो गया,
मेरा घर, मेरे लोग, अब न जाने कहाँ हैं,
मै अब खुद से डरता हूँ,
ज़ोर-ज़ोर चिल्लाता हूँ, 
अब रो नहीं सकता,
जो मरती, डाटती, नाराज़ होती,
वह पता नहीं कैसी होगी?
मै नहीं कहूँगा,
माँ तुम्हारी याद आती है,
मै अब भी उतना ही डरता हूँ,
सच में मुझे पता नहीं,
मै किससे क्यों लड़ रहा हूँ?
सामने खून बहता है, धमाके होते हैं,
न कुछ देखता हूँ, न सुनता हूँ,
चीखता हूँ न जाने किस पर?
ढूँ‌ढता हूँ न जाने किसको?
मै कौन हूँ, क्या हूँ, क्या कहूँ?
मै खुद से दूर अज़नबी हो गया हूँ,
किसी गली, किसी सड़क से, 
फर्क नहीं पड़ता,
मुड़ के इन रास्तों को कहाँ देखता हूँ,
मुझे मालूम है, मेरी कोई वापसी नहीं है,
कोई घर नहीं है, जहाँ लौट कर,
जाना हो, अब कोई पता नहीं है,
वह नाम जो घर वालों ने दिया था,
 उसे भूले एक अरसा हो गया,
हाँ मै ड़रता हूँ, जीने की न जाने क्यों?
चाहत अब भी रखता हूँ,
कोई उम्मीद शायद अब भी बची है,
तभी धमाका होता है,
कई दिनों से हम साथ थे,
नाम की जरूरत नहीं पडी,
मै इस बार बच गया,
मै चीखता हुआ आगे बढा‌,
सबने समझा मै बहुत बहदुर हूँ,
जबकि उस धमाके के बाद जो हुआ,
उसे देखने की हिम्मत नहीं थी,
मै बिना आँसू रो रहा था,
मेरे मुँह से नारे निकल रहे थे,
जिसके सिवा बहुत दिनों से,
और कुछ बोला नहीं था,
मै लड़ता रहा न जाने किसके लिए?
हाथ में बंदूक थामे बढ़ रहा हूँ,
छोड़के सबकुछ,
 न जाने कहाँ,चल रहा हूँ,
खून बहता है मेरा, रोज़ मरता हूँ यहाँ,
न जाने किसके लिए?
आज़ रहनुमाओं ने फैसला किया है,
 बागियों की अब उन्हें, जरूरत नहीं है,
नयी फौज़ बनेगी, नए हथियार आएंगे,
अब नारा दूसरा है, यही तो खेल है,
प्यादों को तो मरना है,
यूँ सत्ता, ताकत का व्यापार होगा,
जो सबसे कमज़ोर है,
पहला शिकार वही होगा... 

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