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Showing posts from January, 2016

child soldier

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लड़ रहा हूँ मै यहाँ न जाने किसके लिए, किससे बदला लूँ किसका कत्ल करूँ, मेरे गाँव से शहर तक एक ही मंजर है, मेरे लिए कोई जगह नहीं है, वो कहते हैं, तुझे लड़ना होगा, तूँ हमारा है, तेरे लोग खतरे में हैं, तूँ हमारा है, हमारे साथ चल, तुझे सब मिलेगा, बस ए वाला हथियार अपने साथ रख, मैंने पूँछा मेरा घर कहाँ है? उसने आँखे लाल की, एक झंडा‌ दिया, फिर नारा दिया, क्या ए काफी नहीं है? तेरे लिए, घर की बात तो कायर करते हैं, हम तो आग हैं, जलते हैं, जलाते हैं, तभी मै समझा, मेरा घर क्यों जला, वहाँ पहले से ही कोई मौजूद था, जिसमें यही आग भरी थी, न जाने कब से जल रहा था, जिसकी चिंगारी से मेरा घर राख हुआ, उसकी बात ड़र कर सुनता रहा, वह खतरों की बात करता रहा, उसकी शक्ल, उसकी बात, मुझे डराती रही, फिर ज़ोर-ज़ोर नारे लगे, और मै खो गया, मेरा घर, मेरे लोग, अब न जाने कहाँ हैं,

समझ

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काश मुझमे थोडी समझ होती, रामयन,कुरान समझ पाता, तो सोचिए दुनिया कैसी होती। अफसोस यही है कि सब सही हैं, सब अपनी पर कब से अडे हैं, शायद इसी वज़ह से, अब तक वहीं गडे हैं, न आगे बढे‌, न कुछ सीखा। काश पेड़ ही होते,  तो,वक़्त के साथ बढ जाते, फल नहीं तो, कम से कम छाया देते