इंतजार

खाली नाव किनारे पर, 
बैठी, रूठी,लगती है, 
दूर किनारा उस पार का, 
उदासी से तकता है.
इंतजाम कुछ भी कर लो, 
एक दूर किनारा होता है, 
सुबह-शाम की लम्बी दूरी,
सूरज रोज़ तय करता है, 
तभ भी दोनों मिल न पाते, 
रात वहीं हो जाती है.
सुबह अकेला ही मिलता है, 
लाख जतन करने पर. 
खाली नाव मांझी का, 
इंतजार करती है,
एक किनारे से मिलके, 
दूजे को तकती है. 
इंतजार किसी का, 
कहाँ ख़त्म होता है,
एक तिनका मिलते ही, 
नए ख़ाब बुनता है. 
ऐसे ही हर वक़्त,
इंतजार रहता है.         

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