मेरा कोना

इस कोने में 'यूँ', 
चुपचाप बैठे हो, 
लगता है दुनिया से, 
चंद दिनों में, 
गुस्सा, नाराज़गी सीख ली है.
अब तुम्हारे साथ, 
ए सब बढ़ता जाएगा, 
दुनियादारी नित नए रंग ले आएगी.
कहीं यह कोना बड़ा होगा, 
कहीं नज़र नहीं आएगा, 
ऐसे ही मासूम आँखों से, 
सब पढ़ लेना, समझ लेना,
आस-पास को थोडा परख लेना, 
अंगुली थामे अभी, 
चंद दिन चलोगे, 
फिर अपनी रह बनाओगे,
हाँ कभी-कभी नाराज़ होना, 
फिर ढेरों खुशियाँ बिखेर देना, 
दुनिया के हर कोने का,  
हिस्सा बन जाना,
अपने कोने को, 
तुम इतना बड़ा कर देना.       
(मेरे भांजे सात्विक और सारांश अपने पप्पा के साथ)

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