a journey


जिंदगी किसे, किस मोड़ पर लाएगी ,
कब कहाँ छोड़ जाएगी .
 बरसाती नदी जैसे ,
कभी ए उफनाएगी .
पतवार नहीं, किनारा नहीं ,
किसी मांझी की, ए नाव नहीं .
जीवन की सरिता कैसी,
 हरदम ए बहती रहती .
चाहे हम, या ना चाहें ,
अपनी राह ए चलती रहती .
 नदी नाव का मांझी कौन ,
किनारों से है रिश्ता क्या ?
जीवन पथ पर चलने वाले, 
 बिना रुके ही चलते जाते ,
कहीं राही ,कहीं किनारा ,
पतवारों की बातें क्या ?
नदी जब उफनाती है, 
पतवारों से नाता क्या ?
जीवन की बातें कैसी ? 
नदी-नाव का रिश्ता कैसा ?
सूरज -चाँद की बातें होती ,
नदिया हरदम बहती रहती . 
जीवन की किस बेला में ,
धूप-छावं कब आएगा ?
न जाने राही यह,
 कदम बढाता जाए वह . 
जीवन की अबूझ पहेली ,
मांझी ने तो हरदम खेली .
चप्पू, नाव, नदी का रिश्ता ,
 बिना इसके सभी अधूरा .
बीच नदी में आते ही  ,
सारे रिश्ते जुड़ जाते हैं .
मांझी कौन ? नाव कहाँ ?
 नदिया में है धर कहाँ ?
 चप्पू, नाव ,नदी की बातें ,
साँसों तक ही रिश्ते नाते .... 

Comments

स्मृतियाँ

सक्षम

अग्नि-परीक्षा