ayodhya - hey ram!


 अल्लाह क्या अपने बन्दों पर नाज करेगा ?
इंसानों के क़त्ल को माफ़ करेगा ?
राम बिना मर्यादा रह पाएँगे ?
इंसानों में अंतर कर पाएँगे ?
यह हिन्दू, वह मुसलमान,कौन बताएगा ?
उनकी रक्षा को लड़ते हैं,
 कैसे समझाएगा  ?
 राम को मंदिर अल्लाह को मस्जिद,हम बनाएगे.
वह कहाँ है यह बताएँगे,
 बस यह नहीं जान पाए,वह कहाँ नहीं है . 
बना सके न एक घर खुद की खातिर,
मंदिर-मस्जिद हम चिल्लाएँगे.
मरते भूख से बच्चे खुद के,
पर मूरत को भोग लगाएँगे.
दाता को किया भिखारी,
मंदिर बना बने ब्यापारी.
कमजोर किया ईश्वर को,
 इंसानों  पर किया है आश्रित.
सर्वशक्तिशाली को दीवारों में कैद किया,
 नाम उसका लेकर दंगा और फसाद किया.
राम-रहीम को बेवजह बदनाम किया,
कभी तीरथ, कभी ब्रत का नाम कर दिया.
पर मरते बेबस लोगों की,
फ़िक्र कितनी बार किया ?
कशी और काबा पर न्योछावर क्या न किया,
रोते नंगे बच्चों को हरदम दुत्कार दिया.
कायनात की ख्वाइश में,
मंदिर-मस्जिद का निर्माण किया. 
खुद की खातिर लोगों को,
बेघर कितनी बार किया...?...

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