काश !


आओ बह जाए घटाओं में ,उड़ जाए हवाओं में ।
महक जाए फिजाओं में ,लहक जाए खेतों में ।
भीग जाए ओसो में ,डूब जाए बूंदों में ।
खो जाए मीतो में ,ठण्ड हो रेतों में ।
जीत हो हारों की ,रोटी हो भूंखों की ।
कपडे हो नंगों के ,देश हो बंजारों का ।
भेष हो अनजानों का ,राग हो मस्तानो का ।
गीत हो ज़माने का , सोए सब जग जाए ।
खुशियों में डूब जाए ,भेद सब हट जाएँ ।
नाम सब मिट जाएँ ,है तो यह सपना ही ।
काश सच हो जाए .......
..

Comments

स्मृतियाँ

सक्षम

अग्नि-परीक्षा