सुनामी


पल में ही ख़त्म हो गया सब कुछ ,
चिता जलाने को भी कम पड़ गए लोग ।
दफ़नाने को भी कहीं नहीं कोई ,
सारे पहचान हो गए ख़त्म ।
बस एक ही नाम मृत , लाश बन गए सब लोग ।
जीवन कितना छडिक , हर कोई भाग रहा है ।
कोई जीवन के लिए ,तो कोई म्रत्यु के डर से।
पर !सभी नाकाम ,एक सा ही अंजाम ।
कोई इस पल, तो कोई उस पल ,
इसी मिट्टी में मिल गया ।
बिना किसी नाम, बिना किसी पहचान के ।
कुछ लोगों को, न मिट्टी मिली, न आग ।
वह काम आए परिंदों के ।

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