Monday, 15 May 2017

Delhi=Bangaluru

शर्म के सिवा सब है
फक्र करने की वजह
क्या अब भी बची है?
अब किसी के मजहब का
जिक्र मत करना
बेहयायी में
सब एक जैसे हैं
कफन ओढ ली है
जमीर मरे
एक अर्षा हो गया।
फिर वजह का जिक्र होगा
कोई सियासत, कोई मजहब का,
अजीब सा वजूद गढ़ रहा होगा।
ए सही है यही होगा
ठेकेदार चिल्ला रहा होगा
फिर जो सबसे कमजोर होगा
सारा इल्जाम उसी पर लगेगा
बहुत होगा
कुछ देर शोर मचेगा
जल्द ही
बोर हो जाएंगे
सब भूल जाएंगे
उसी मरे ज़मीर में
लौट जाएंगे।
Rajhansraju

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