Saturday, 27 May 2017

कौन किसको पी गया?

मैंने देखा है,
दोस्त को फ़ना होते,
उसको जाते,
घर वालों को विदा करते,
कौन किसको पी गया,
किससे क्या कहूँ?
आज भी,
उसके जैसा,
जब किसी को देखता हूँ,
बेब़स, उदास हो जाता हूँ,
उसको याद करके।
मेरे सामने होता है,
वो चेहरा आज भी,
हाँ! नाराज था,
पर ए नहीं सोचा था,
इसके बाद,
अब मिलना नहीं होगा कभी।
उसके जाने का वक्त था,
हमारी नजरें मिली,
एक दूसरे से,
कुछ छुपाया हमने,
आँसू थे,
आँख में हमारे,
अब नस़ीहत नहीं थी कोई,
बस यही कहना था,
यूँ  मत जाओ,
सबको छोड़कर।
वह मुस्करया,
जैसे कहना चाहता हो,
कहीं नहीं जाऊँगा,
किसी को छोड़कर।
हाथ थामे बैठे रहे बहुत देर तक,
जो बहुत बोलता था,
आज कुछ कह न सका,
खामोश ऐसे हुआ,
जैसे कुछ जानता नहीं,
कंधे पर बैठकर हमारे,
न जाने क्यों रुखसत हुआ?
अब भी यही सोचता हूँ,
किससे क्या कहूँ?
कौन किसको पी गया?
अब तक समझ पाया नहीं ..
rajhansraju

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