Tuesday, 8 November 2016

पता?


वक्त ही जाने कहाँ, कैसे, कब, क्या हो जाता है,
ए भी हुआ कि अब उन्हें, यहाँ का पता याद नहीं,
विदा हो चुकी बेटी ने,
जब पिता से उसका पता पूँछा,
उसे किसी कार्यक्रम की पाती भेजनी थी,
सवाल तो सही था पर क्या जवाब देता,
जहाँ जन्म लिया वो उसका नहीं था,
फिर वह कैसे याद रखती,
उन बेगानी चीजों को,
पिता ने खुद को समझाया,
अब बिटिया सयानी हो गयी,
अपने घर में रच बस गयी है,
अपनी जिम्मेदारियाँ समझने लगी,
तभी तो यहाँ का पता...
भूल गयी...

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