Friday, 4 November 2016

अभिव्यक्ति


जब देश रहेगा, लोग रहेंगे, लोकतंत्र तभी रहेगा,
न जाने कितनी, सरकारों का आना जाना होगा,
जब सवाल उठेगे, उनके जवाब मिलेंगे,
तब राह बनेगी, हम बनेंगे, देश बनेगा,
जो आवाज उठी, वो घुट गयी
तो सोचो, सच कौन कहेगा?
कुछ कड़वी, कुछ बुरी लगी,
पर बात तो उसने सही कही,
मुझको भी अच्छा लगता है,
सुनना कहना अपने मन की,
सच तो सच होता है,
पर कह पाते हैं कितने?
कुछ आवाजें,
जो रखती हैं जिन्दा,
न जाने किस किसको,
कभी उम्मीद बन जाती है वो,
किसी ऐसे कि, जो न था खबरों में,
वह न तो मेरे जैसा दिखता,
न मेरे जैसा कहता है,
पर वह हम में ही रहता है,
अपना ही हिस्सा है,
कुछ उसकी बात भी होनी है,
कुछ ऐसी जगहे रहने दो,
औरों को भी कुछ कहने दो,
असहमत होने का हक तुमको है,
उनको भी अपनी कहने दो..

No comments:

Post a Comment