Sunday, 11 November 2012

छूटना



रोशनी से नहाकर निकली,
तो रंग और खिल गया,
हवा ने हर जगह खुशबू भर दिया,
वक़्त गुज़रता रहा,
फिर कोई संग ले गया,
सुबह हुई, 
वह सोई रही,
पहले वाली बात नहीं थी  
अपने  साख से,
बहुत दूर जा चुकी थी।


Monday, 22 October 2012

पानी ही है


ए दरिया है, वो सागर है ,
ए बदल है, वो वारिस है,
आँख से जो बहता है,
आँसू जिसको कहते हैं,
पानी है, सब पानी है। 

Friday, 12 October 2012

a salute to malala


you have not to see the sky,
you have not to walk the soil,
you have not to breath the air,
you have not to drink the water,
because it is mine.
i want control you,
i want define you,
i want protect to god,
i want die to god,
i want you, to be like me,
because only i know the god,
this text is right,
this path is right,
this clothe is right,
because only i am the right.
why you think?
why you dream?
why you know?
why you protest?
when i am here.
i will preach,
i will define,
i will decide,
how to live,
how to die,
how to pray,
how to cry,
i am the master,
i am the ruler.

Friday, 21 September 2012

आज बंद है


सुबह के वक़्त, नुक्कड़ की दुकान पर, 
काफी भीड़ थी, 
कई रंगों के बैनर पोस्टर लिए लोग खड़े थे।
 भरपूर नाश्ता किया, 
दोपहर में कहीं और खाने का प्रबंध था, 
शहर में एक दिन की मजदूरी, 
कम से कम दो सौ रूपए है, 
इससे कम में कोई तैयार न था, 
जैसे तैसे साथ में ,
नाश्ते और खाने से बात बन गई, 
बंद कराने की तयारी पूरी हुई,
नए लाठी डंडे दिए  गए,
कुछ नए नारे तख्तियों पर लिखे, 
नेताजी ने क्रीज़ टाईट की,  
कुछ ने कुरता-पजामा, 
तो कुछ ने चमचमाती,  
सफ़ेद पैंट शर्ट पहनी, 
पैरों में बड़ी कंपनी का स्पोर्ट शू।
मीडिया चौराहे पर तैनात है, 
नेताजी का जलूस चल पड़ा, 
कुछ ठेले, खोमचे वालों को हडकाया,
साईकिल, रिक्शे से हवा निकाली,
 कमज़ोर दुकानदारों की शटर गिराई,
बड़ी दुकाने ज्यादातर इन्हीं की थी, 
पास खड़ी गाड़ियों में, 
इन्हीं का सामान था।
चौराहे पर, 
किसी सरकार का पुतला फूँका गया ? 
वैसे यह पुतला,
 सफ़ेद कुर्ता-पजामा,पहने था, 
शायद नेताजी का ही पुराना कपड़ा था,
उन जैसा ही था।
फोटो खिचाई की रश्म, 
बखूबी निभाई गई, 
सड़क पर लगा जाम बढ़ता रहा,
 कोई  बीमार था, 
किसी की नौकरी का सवाल था,
नेताजी ने कुछ कहा, 
चमचों ने ताली बजाई, 
दोनों को उसका मतलब पता नहीं था,
सड़क पर बढ़ते काफिले के अन्दर, 
गुस्सा उबलता रहा।
वहीं पुलिस का सिपाही बेमन खड़ा था, 
वर्दी में भी आम आदमी ही था,
अपने साहब पर तरस खा रहा था, 
बस एक मौका तलाश रहा था।
कुछ देर में इस पार्टी वाले चले गए, 
दूसरी पार्टी को भी, 
बंद कराने, 
जाम लगाने का मौका देना था।  
नाश्ते  की दुकान वही थी, 
उन्हीं तख्तियों पर, 
दूसरे नारे पोस्टर लगने लगे,
फिर सब कुछ वही था, 
सिर्फ सफ़ेदपोश की शक्ल बदल गयी।
काफिला अब भी वहीँ रुका पड़ा है,
वक़्त के  इंतजार में,
अन्दर ही सुलग  रहा है।।

Monday, 10 September 2012

मुठ्ठी में आकाश


आसमान खुला पड़ा था, 
अपना हिस्सा बांध रहा था, 
एक-एक लम्हा गुज़र रहा था, 
खुद को समेटे बढ़ रहा था, 
डर से मुठ्ठी बांध लिया था, 
कुछ अपना लिए, 
लड़खड़ा  रहा था,
ठोकर से गिरा तभी, 
बंद मुठ्ठी खुली वहीं, 
चारों तरफ आसमान था, 
मुठ्ठी में कुछ नहीं था, 
बेवज़ह बांधे परेशान था।

Tuesday, 21 August 2012

फेसबुकिए



फेस बुक पर बईठा हैन, 
रात भर ई जागत हैन,  
काठ क घोड़ा  दउडावइं , 
दुपहर तक ई सोवत हैन.
गूगल के चक्कर में, 
घनचक्कर बन जावत हैन, 
छुप-छुप के ई कुछ ताकत हैन, 
पढ़ाई लिखाई क बहाना कईक, 
 दूसर वीडियो झाँकत हैन,
बाडी क फिजियालाजी-एनाटामी, 
सब जानत हैन, 
प्राइमरी पास होतइ,
मेडिकल साइंस बाँचत  हैन,   
पापा-मम्मी के अउतइ, 
विकीपीडिया खुलि जावत हइ.
आन लाइन फ्रैंडन से, 
दिन-रात बतियावत हैन, 
समझ आई अब हमके,
उल्लू की नाहीं काहे?  
दिन-रात ई जागत हैन,   
अकल क बत्ती गुल कईक,
सब आँखन से ताकत हैन, 
समझ न आवइ तबउ, 
सब शेयर कर जावत हैन,
इहाँ क फोटो उहाँ लगाई, 
दुसरे जगह से लेंइ चोराइ, 
आपन वाल, 
अइसइ रंगीन बनावत हैन.
फर्जी नाम पता से,
 लडिका, लड़की बनि जावत है. 
कुछ फद्दी गन्दी फोटो पर,
सबक ध्यान जावत है. 
पता चला ई वाली साईट, 
काउनउ कंपनी चलावत  है, 
अइसइ पढ़ा-लिखा लोग,    
लाइक-शेयर के चक्कर में, 
नादानी कर जावत हैन, 
एक  छोटी सी क्लिक कइक, 
लोगन क घर छुड़वत हैन,
हर-तरफ कइसन अफरा-तफरी, 
मच जावत है, 
जान बचावइ खातिर,
 इहाँ-उहाँ सब भागत हैन,
हम तोहरे संग हई, 
अब ई वाला क्लिक दबावत हैन,
सारी रात उल्लू जइसन, 
बिना अकल, ई जागत हैन,
फेस बुक पर बइठा हई हम, 
लाइक  क्लिक ...              
                           

Tuesday, 12 June 2012

लिखावट


एक लिखावट सामने रखी थी, 
बड़े गौर से देखा, 
समझने की सारी कोशिशें नाकाम रही, 
भाषा और लिपि का विशेषज्ञ था, 
कई साल उलझा रहा, 
कहीं कोई संकेत मिल जाता, 
कुछ तो समझ पाता, 
कोशिशें करता रहा, 
बहुत सी लिपयों को समझ चुका था, 
डूबी खोई सभ्यताओं को नए रूप,
 नए आकार देता रहा, 
अतीत को आज के लिए संजोता रहा, 
उम्र तमाम लिखावाटों को,
 पढ़ने में निकल गयी,
मगर! वह छोटा सा टुकड़ा, 
आज तक पहेली बना रहा, 
वह लिखावट उसे बेचैन करती रही,
लगता है- यह नाकामी 
सारी कोशिशों की हद बताती है, 
जो चाहता था न पा सका, 
यह टुकड़ा हर वक़्त याद दिलाता है,
थका, हारा, बेमन, बैठा, 
उस टुकडे से जूझ रहा था, 
सामने एक छोटा सा बच्चा, 
हँसता हुआ,
मिट्टी में बड़ी लगन से,
 कुछ बना रहा था, 
वह भी हँसने लगा, 
कुछ लिखावटें,
 ऐसे ही लिखी जाती हैं,
जो किसी और से,
 कभी नहीं पढ़ी जाती हैं.  

Thursday, 5 April 2012

मोटापा


कहीं वेट जब बढ़ जाए, 
खाना देख रहा न जाए, 
समझो मोटापा दूर न जाए. 
चाट-पकौड़ी मन को भाए,
आइसक्रीम छूट न पाए, 
मोटापा रोज़ बढ़ता जाए,  
एक दिन सोचा ! भूखा रह ले, 
खाना कुछ कम खा लें,
क्या खा कर वेट घटाएँ ? 
सोचें ए कुछ कर न पाएं, 
खाना देख सबर न आए,
दुगनी ताकत से फिर खाएं, 
वेट ऐसे ही बढ़ता जाए, 
सिवा पेट कुछ नज़र न आए.  


Monday, 5 March 2012

आदमी-नया है..

उसकी लाचारी, 
बेबसी पर मत हंसो, 
कुछ वक़्त का तकाजा है, 
हालात का मारा है,
थोडा सा रुआंसा है, 
कुछ बोलने कहने में, 
सकुचाता है, 
शहर में नया-नया है,
हर जगह उम्मीद से तकता है, 
बारीकी से समझता है, 
सादगी, मासूमियत नज़र आती है,
शायद! कुछ कम पढ़ा-लिखा है, 
कैसे भी,
 आराम से ज़मीन पर बैठ जाता है,
कहीं मिटटी का एहसास छुपा है, 
कुछ दिनों गलियों की खाक छानेगा,
चंद लोगों से दोस्ती होगी, 
दो-चार किताबें पढ़ेगा,
दुनिया के स्कूल से, 
अच्छे नंबरों में पास हो जाएगा. 
ऐसे ही एक और आदमी,
हम जैसा हो जाएगा.        
   

इंतजार

खाली नाव किनारे पर, 
बैठी, रूठी,लगती है, 
दूर किनारा उस पार का, 
उदासी से तकता है.
इंतजाम कुछ भी कर लो, 
एक दूर किनारा होता है, 
सुबह-शाम की लम्बी दूरी,
सूरज रोज़ तय करता है, 
तभ भी दोनों मिल न पाते, 
रात वहीं हो जाती है.
सुबह अकेला ही मिलता है, 
लाख जतन करने पर. 
खाली नाव मांझी का, 
इंतजार करती है,
एक किनारे से मिलके, 
दूजे को तकती है. 
इंतजार किसी का, 
कहाँ ख़त्म होता है,
एक तिनका मिलते ही, 
नए ख़ाब बुनता है. 
ऐसे ही हर वक़्त,
इंतजार रहता है.