Wednesday, 16 March 2011

magic

पूरी दुनिया जादू से भरी है, 
पत्तों का रंग, फूलों की खुशबू, 
सब अजूबा है,
मकड़ी का जाला बुनना,
उसमे कीड़े का फंस जाना,
लाख कोशिशों का बावजूद, 
छोटी मकड़ी से हार जाना. 
तितली का फूलों से रंग लेना,
मधुमक्खी का रस चुराना. 
किसी जादूगर की ही कल्पना हैं,
जो ढेर सारे रंग भरता है,
अपने हाथों नई-नई रचनाएँ करता है, 
कभी किसी पर्वत से, 
नदी बह पड़ती है,
खेलते कूदते समुन्दर तक पहुँच जाती है. 
थोड़ी गर्माहट और ठण्ड हो,
इसके लिए ढेर सारी बर्फ और रेत है. 
धरती को हर रंग से भर दिया.
ढेर सारा पानी, पेड़-पौधे, और ज़मीन दिया, 
हर कोने को अलग पहचान दी.
इसके लिए रंग बिरंगे जीवों की पूरी सौगात दी, 
वह अपनी कल्पना के रंग भरता रहा.
जीवों और पौधों को उन्नत करता गया, 
अपनी शानदार रचना देखकर खुश होता रहा;
इस ख़ुशी में एक भूल कर गया, 
न जाने क्यों?
 इन्सान को अक्ल दे दिया.        
          

Friday, 4 March 2011

समय चक्र

अतीत, वर्तमान को देखकर दुखी है, 
वह क्यों भविष्य के सपनों  में खोया है .
वक्त के हर लम्हे की यही कहानी है, 
वह आज से खुश नहीं,
उसके यादों और सपनों में,
कल से कल तक की दूरी समाई है. 
आज हर पल साथ होता है, 
अतीत और आगे की सिर्फ बातें हैं ,
वक्त फासलों को, 
लम्हों में तय करता है,
धीरे-धीरे सब बदल जाता है, 
हम कुछ नहीं समझ पाते.
यह आज जो कभी कल था,
बीता हुआ कल बन जाता है, 
कहने सुनाने की बातें हैं,
यादों में रह जायेंगी. 
कल, आज, कल में जो होना है, 
एक पल में हो जाता है ,
आदमी अफ़सोस करता, 
सोचता रह जाता है. 
वक्त शदियों का फासला  ,
पल-पल में तय कर जाता है ..