Friday, 5 November 2010

दीपावली

हर अँधेरी राह में, 
एक छोटा सा दीप जलाएँगे,
प्यार की तेल बाती से,
 एक नया सूरज उगाएँगे.
वह सबके हिस्से आएगा , 
अपनी रोशनी घर-घर ले जाएगा .
जब दीप से दीप मिल जाएँगे , 
यह सूरज थोडा बड़ा हो जाएगा .
आज अमावास की बेला में ,
सबको यह जगाएगा.
उमंगों और खुशियों को लपेटे ,
बड़ी सुबह उठ जाएगा .
हम सब की आँखों में ,
गुनगुनाता, हँसता ,
एक नया सवेरा ,
बस जाएगा .. 

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