Monday, 18 October 2010

बेटियाँ

मौसम कितनी जल्दी बदल जाते हैं ,
जब एक आता है ,
दूसरा चला जाता है .
यादें ही बची रह जाती है ,
एक मौसम में दूसरे की .
बेटियाँ कितनी जल्दी बड़ी हो जाती हैं ,
बीते मौसम की तरह यादों में रह जाती है ,
वक्त के साथ चल देती हैं ,
सब कुछ स्वीकार कर लेती हैं .
वह भी इतनी सहज ,
जैसे कुछ बदला ही नहीं .
ऐसे ही हरदम ,
किसी अनजाने घर में  ,
प्यार से ,
 एक परिवार बनाती है ||

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