Thursday, 7 October 2010

कोशिश

ऐसी कोशिश  ताउम्र होनी चाहिए,
कोई कुछ भी कहे कोई फर्क न पड़े .
 औरों जैसा होने की चाहत न रहे ,
इस दौड़ से दूर, एक मुकाम हो,
अपनी कुछ अलग पहचान हो .
कुछ अजीब लोग भी इस दुनिया को चाहिए ,
जो महसूस करें हर दर्द, हर आह को .
अपने से परों की भी परवाह हो ,
बिना कहे बिना सुने ,
 किसी को देख के ,मुस्करा देना .
थोड़ी देर रुक जाना ,साथ बैठ जाना .
अनजाना सा कुछ बाँट लेना,साथ होने का भरोसा ,
एहसास अपने पन का ,कितना कुछ दे जाता है . 
एक पल में भरोसा -प्यार ,और न जाने क्या -क्या .
अनकही बातें भी समझ ली जाती हैं ,
एक दिलासा दे जाती हैं .
किसी के पास चुपचाप ,यूँ ही बैठे रहें .
बिना शब्दों के, खुद का एहसास होने दें .
 कुछ देर के लिए दुनिया का गुढा गढ़ित भूल जाएं .
दुनिया को खूबसूरत निगाहों से देख पाएं ,
 किसी के काम आए ,इसी में सकूं पाएं .
शिकवा शिकायत की आदत भूल जाएं ,
एक कोशिश ,यह भी करें ,
औरों के खुश होने पर ,
 हम भी खुश हो जाएँ .

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