Saturday, 8 May 2010

कलयुग


बड़े झूंठ हैं ,बड़ी बेवफाई है ,दुनिया में ,
कहतें हैं , घोर कलयुग आ गया ,कोई किसी का नहीं ।
सब धोखे बाज दिखते हैं ,हर कोई यही कहता ,
भगवान भरोसे ही आज सब चलता ।
मै कितना अच्छा हूँ ,वह कितना बुरा है ,
मै कितना कुछ जानता हूँ ।
अपने को अध्यात्म और आदर्श का प्रतीक भी मनाता हूँ ,
पर छोटी सी भी पहचान क्यों नहीं बन पाती ।
मै भी दुनिया को औरों की तरह ,देखता और ठगता रहा ,
झूंठी बेबसी दिखाता रहा , दूसरों के गिरने पर हँसता रहा ।
खुद के अच्छा होने का ढोंग करता रहा ,
पर एक बार भी अपने गिरेबान में नहीं देखा । ...

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