Saturday, 20 March 2010

काश !


आओ बह जाए घटाओं में ,उड़ जाए हवाओं में ।
महक जाए फिजाओं में ,लहक जाए खेतों में ।
भीग जाए ओसो में ,डूब जाए बूंदों में ।
खो जाए मीतो में ,ठण्ड हो रेतों में ।
जीत हो हारों की ,रोटी हो भूंखों की ।
कपडे हो नंगों के ,देश हो बंजारों का ।
भेष हो अनजानों का ,राग हो मस्तानो का ।
गीत हो ज़माने का , सोए सब जग जाए ।
खुशियों में डूब जाए ,भेद सब हट जाएँ ।
नाम सब मिट जाएँ ,है तो यह सपना ही ।
काश सच हो जाए .......
..

परिवर्तन


जिंदगी में बदलाव आते हैं ,
हर पल कुछ नया हो जाता है ।
शक्ल सूरत भी , एक सी कहाँ रहती ।
अरमान कुछ और हो जाते हैं ,
नए इरादे नए फ़साने बन जाते हैं ।
हकीकत से जब दो -चार होते हैं ,
जिंदगी के मायने बदल जाते हैं ।
अपनों से ही गिला - शिकवा होता है,
दुशवारियों में जब घिरा होता है ।
उड़के आसमान में कहाँ जाओगे ,
थक जाओगे !
लौट कर जमीन पर ही आओगे ।
भाग लो खुद से कितना भी ,
एक दिन ठहर जाओगे । ।